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सबकुछ हो गया रुक्सत,बस रेह गई यादे तेरी

"बड़ा महँगा पड़ा मुझे,

तेरे शेहेर मे रहना,

आज भी किशतों में कटती है,

राते मेरी"



"तुझे पाते पाते हम,

खुद को भूला बैठे,

सबकुछ हो गया रुक्सत,

बस रेह गई यादे तेरी"


"और बता क्या इससे करीब तू,

रेह सकती है रकीब के,

इस जेहेन में आज भी,

दफन है गर्म साँसे तेरी"


"मर्जी तेरी अगर रखे है,

खत तूने अपने द़राज में,

हम सारा शेहेर सुलगा बैठे,

मिटाने यादे तेरी"

1 Comment


Aarohi Joshi
Aarohi Joshi
Dec 26, 2020

❤️❤️❤️❤️

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BASICKAVI

केहना चाहता था मोहम्मद लेकीन मुकद्दर सुनाई आया,

मुकद्दर हि बोल गया गालिब इम्तिहान नजर आ गया,

इम्तिहान हि क्या सिखाये मुझे जिना ये सुकून,

फिर से मोहम्मद केहने से हि जीतका जाम नजर आ गया.

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-BasicKavi

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