में जान ना पायाxBd sumna.jliJul 23, 20201 min read"दर्द उसे भी होता था पर में जान ना पाया,बारिश में वो भी रोती थी, में पहचान ना पाया" "बड़ी अनोखी सी लड़की थी वो,मेरा माथा चूमा करती थी,अकेला पडू अगर रहो में तो हाथ थामा करती थी,हर दुआ उसने मेरे लिए मांगी में ये जान न पाया,में उसे पेहेचान ना पाया" "वो काजल भरी निगाहों से दुनिया को जन्नत बनाती थी,चाहे चुप सी रहे वो गीत मीरा से गाती थी" "हर चीज़ में अलग नजरिया उसका मुझे जीना सिखाया,वो लड़की थोड़ी अलग सी थी,बस में पेहेचान ना पाया""दर्द उसे भी होता था पर में जान ना पाया,बारिश में वो भी रोती थी, में पहचान ना पाया" "बड़ी अनोखी सी लड़की थी वो,मेरा माथा चूमा करती थी,अकेला पडू अगर रहो में तो हाथ थामा करती थी,हर दुआ उसने मेरे लिए मांगी में ये जान न पाया,में उसे पेहेचान ना पाया" "वो काजल भरी निगाहों से दुनिया को जन्नत बनाती थी,चाहे चुप सी रहे वो गीत मीरा से गाती थी" "हर चीज़ में अलग नजरिया उसका मुझे जीना सिखाया,वो लड़की थोड़ी अलग सी थी,बस में पेहेचान ना पाया" -g`ex xmaR
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