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में जान ना पाया


"दर्द उसे भी होता था पर में जान ना पाया,

बारिश में वो भी रोती थी, में पहचान ना पाया"

"बड़ी अनोखी सी लड़की थी वो,

मेरा माथा चूमा करती थी,

अकेला पडू अगर रहो में तो हाथ थामा करती थी,

हर दुआ उसने मेरे लिए मांगी में ये जान न पाया,

में उसे पेहेचान ना पाया"

"वो काजल भरी निगाहों से दुनिया को जन्नत बनाती थी,

चाहे चुप सी रहे वो गीत मीरा से गाती थी"

"हर चीज़ में अलग नजरिया उसका मुझे जीना सिखाया,

वो लड़की थोड़ी अलग सी थी,

बस में पेहेचान ना पाया""दर्द उसे भी होता था पर में जान ना पाया,

बारिश में वो भी रोती थी, में पहचान ना पाया"

"बड़ी अनोखी सी लड़की थी वो,

मेरा माथा चूमा करती थी,

अकेला पडू अगर रहो में तो हाथ थामा करती थी,

हर दुआ उसने मेरे लिए मांगी में ये जान न पाया,

में उसे पेहेचान ना पाया"

"वो काजल भरी निगाहों से दुनिया को जन्नत बनाती थी,

चाहे चुप सी रहे वो गीत मीरा से गाती थी"

"हर चीज़ में अलग नजरिया उसका मुझे जीना सिखाया,

वो लड़की थोड़ी अलग सी थी,

बस में पेहेचान ना पाया"

-g`ex xmaR

3 Comments


Sundar

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bhushankulkarni456
Jul 26, 2020

Apratim

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Aarohi Joshi
Aarohi Joshi
Jul 23, 2020

❤️❤️

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BASICKAVI

केहना चाहता था मोहम्मद लेकीन मुकद्दर सुनाई आया,

मुकद्दर हि बोल गया गालिब इम्तिहान नजर आ गया,

इम्तिहान हि क्या सिखाये मुझे जिना ये सुकून,

फिर से मोहम्मद केहने से हि जीतका जाम नजर आ गया.

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-BasicKavi

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