top of page

तो खत लिखा करों।


जब रूठें कोई, औंर मनाना हों उसकों

तो खत लिखा करों।


ना लंबी हों बातें औंर करनी हो मुलाकातें

तों खत लिखा करों।


देना हो कोई उपहार औंर ना सूझें कोई विचार

तों खत लिखा करों।


हरदम जब रखना हों उसकों पास औंर ना कोई सूझें उपचार

तों खत लिखा करों।


नींद ना आए जब रातों कों औंर जकड़ लें यें अंधियारा

तो खत लिखा करों।


करनी हों जब लंबी बातें औंर वक्त की हो पांबदी

तो खत लिखा करों।


आँखों सें दिल तक पहुँचाना हो जब बातें

तो खत लिखा करो।


बिना बोलें जब समझाना हो बातें,

तो खत लिखा करों।

1 Comment


Aarohi Joshi
Aarohi Joshi
Dec 31, 2020

So sweet..❤️❤️

Like
BASICKAVI

केहना चाहता था मोहम्मद लेकीन मुकद्दर सुनाई आया,

मुकद्दर हि बोल गया गालिब इम्तिहान नजर आ गया,

इम्तिहान हि क्या सिखाये मुझे जिना ये सुकून,

फिर से मोहम्मद केहने से हि जीतका जाम नजर आ गया.

21762706_122912915032270_498497404420708

-BasicKavi

bottom of page