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उस नदी के छोर से

"पुकारता चला था में,

उस नदी के छोर से,

कुछ बाते सुनी हवाओ की,

कुछ छेड़ी अपनी और से"

"बंदिशों से दूर था,

में खुदमे अब जो पूर्ण था,

घट गई जो ज़िन्दगी,

कर अलविदा अपनी और से,

पुकारता चला था में उस नदी के छोर से"

"में आग हु जो जल पड़ा,

मुसाफिर था जो चल पड़ा,

में चलते चलते आ गया,

आगे अब उस छोर से,

जुगनू हु में चलदिया दूर सदी के शोर से,

पुकारता चला था में उस नदी के छोर से"

"तुझसे अब जो बात हो,

एक जाम की सौगात हो,

बात हो इन आँखों से,

बस वो हसी एक रात हो,

एक ग़ज़ल तेरे हुस्न पे,

में गाउ अपनी और से,

जो पुकारता चला था में उस नदी के छोर से,

कुछ बाते सुनी हवाओ की,

कुछ छेड़ी अपनी और से"

- गणेश शर्मा

4 Comments


👌👌

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Abhishek Joshi
Abhishek Joshi
Jul 22, 2020

👌👌

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bhushankulkarni456
Jul 21, 2020

Kya bat hai Bhai awesome

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Aarohi Joshi
Aarohi Joshi
Jul 21, 2020

खूपच सुंदर....❤️❤️👌👌

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BASICKAVI

केहना चाहता था मोहम्मद लेकीन मुकद्दर सुनाई आया,

मुकद्दर हि बोल गया गालिब इम्तिहान नजर आ गया,

इम्तिहान हि क्या सिखाये मुझे जिना ये सुकून,

फिर से मोहम्मद केहने से हि जीतका जाम नजर आ गया.

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-BasicKavi

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