मन
- raशी मड़ावी
- Jan 29, 2021
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दिल पर किसका डेरा हैं, बता तुझें किसनें घेरा हैं। बिना ब़ात बहुत ही सोचें हैं, मन को अपनें ही नोचें हैं। तूने खुद को कहाँ उलझाया हैं, ना-जानें किनसें तू टकराया हैं। यें कैसा जंजालों का स़ाया हैं, जिनसें तू निकल ना पाया हैं। नहीं तेरा कोई ढ़िकाना हैं, तुझें तो ब़स तितली सा उड़ता जाना हैं।



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