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मन

दिल पर किसका डेरा हैं, बता तुझें किसनें घेरा हैं। बिना ब़ात बहुत ही सोचें हैं, मन को अपनें ही नोचें हैं। तूने खुद को कहाँ उलझाया हैं, ना-जानें किनसें तू टकराया हैं। यें कैसा जंजालों का स़ाया हैं, जिनसें तू निकल ना पाया हैं। नहीं तेरा कोई ढ़िकाना हैं, तुझें तो ब़स तितली सा उड़ता जाना हैं।

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BASICKAVI

केहना चाहता था मोहम्मद लेकीन मुकद्दर सुनाई आया,

मुकद्दर हि बोल गया गालिब इम्तिहान नजर आ गया,

इम्तिहान हि क्या सिखाये मुझे जिना ये सुकून,

फिर से मोहम्मद केहने से हि जीतका जाम नजर आ गया.

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-BasicKavi

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