सबकुछ हो गया रुक्सत,बस रेह गई यादे तेरी
- g`ex xmaR .

- Dec 26, 2020
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"बड़ा महँगा पड़ा मुझे,
तेरे शेहेर मे रहना,
आज भी किशतों में कटती है,
राते मेरी"

"तुझे पाते पाते हम,
खुद को भूला बैठे,
सबकुछ हो गया रुक्सत,
बस रेह गई यादे तेरी"
"और बता क्या इससे करीब तू,
रेह सकती है रकीब के,
इस जेहेन में आज भी,
दफन है गर्म साँसे तेरी"
"मर्जी तेरी अगर रखे है,
खत तूने अपने द़राज में,
हम सारा शेहेर सुलगा बैठे,
मिटाने यादे तेरी"



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