उस नदी के छोर सेxBd sumna.jliJul 21, 20201 min read"पुकारता चला था में,उस नदी के छोर से,कुछ बाते सुनी हवाओ की,कुछ छेड़ी अपनी और से" "बंदिशों से दूर था,में खुदमे अब जो पूर्ण था,घट गई जो ज़िन्दगी,कर अलविदा अपनी और से,पुकारता चला था में उस नदी के छोर से" "में आग हु जो जल पड़ा,मुसाफिर था जो चल पड़ा,में चलते चलते आ गया,आगे अब उस छोर से,जुगनू हु में चलदिया दूर सदी के शोर से,पुकारता चला था में उस नदी के छोर से" "तुझसे अब जो बात हो,एक जाम की सौगात हो,बात हो इन आँखों से,बस वो हसी एक रात हो,एक ग़ज़ल तेरे हुस्न पे,में गाउ अपनी और से,जो पुकारता चला था में उस नदी के छोर से,कुछ बाते सुनी हवाओ की,कुछ छेड़ी अपनी और से" - गणेश शर्मा
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Kya bat hai Bhai awesome
खूपच सुंदर....❤️❤️👌👌